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Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी के दिन नहीं देखना चाहिए चांद, जानिए इसके पीछे का पौराणिक कारण

Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यह त्योहार...
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Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यह त्योहार आमतौर पर अगस्त या सितंबर में पड़ता है और घरों और सार्वजनिक स्थानों पर गणेश मूर्तियों की स्थापना के साथ शुरू होकर दस दिनों तक चलता है। यह त्योहार (Ganesh Chaturthi 2024) जलाशयों में गणेश की मूर्तियों के विसर्जन के साथ समाप्त होता है। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है।

Ganesh Chaturthi 2024कब है इस वर्ष गणेश चतुर्थी

द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2024) शनिवार, 7 सितम्बर को मनाया जायेगा। इस दिन मध्याह्न गणेश पूजा का मुहूर्त 11:04 से 13:28 बजे तक रहेगा। कुल 02 घण्टे 25 मिनट्स तक पूजा का मुहूर्त रहेगा। गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिन के बाद, अनन्त चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। इस बार गणेश विसर्जन मंगलवार, 17 सितम्बर को होगा।

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - सितम्बर 06, 2024 को 13:31 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - सितम्बर 07, 2024 को 16:07 बजे

Ganesh Chaturthi 2024गणेश चतुर्थी के दिन नहीं देखना चाहिए चांद

गणेश चतुर्थी के दिन चांद का दर्शन नहीं करना चाहिए। चतुर्थी तिथि के प्रारम्भ और अन्त समय के आधार पर चन्द्र-दर्शन लगातार दो दिनों के लिये वर्जित हो सकता है। एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय पांच सितम्बर को 13:31 से 6 सितम्बर को 20:42 बजे तक है। वहीं गणेश चतुर्थी के दिन चांद के दर्शन का वर्जित समय सुबह 08:55 से 21:25 रात तक है। इसका अर्थ है कि 12 घण्टे 31 मिनट्स तक चांद को देखने से बचना चाहिए।

ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चांद देखने से अपशकुन होता है और देखने वाले पर झूठी चोरी का आरोप भी लग सकता है। द्रिक पंचांग के लिखा है कि पौराणिक गाथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण पर स्यमन्तक नाम की कीमती मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था। ऐसे में नारद ऋषि ने उन्हें बताया कि भगवान कृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चन्द्रमा को देखा था जिसकी वजह से उन्हें मिथ्या दोष का श्राप लगा है।

नारद ऋषि ने भगवान कृष्ण को आगे बतलाते हुए कहा कि भगवान गणेश ने चन्द्र देव को श्राप दिया था कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दौरान चन्द्र के दर्शन करेगा वह मिथ्या दोष से अभिशापित हो जायेगा और समाज में चोरी के झूठे आरोप से कलंकित हो जायेगा। नारद ऋषि के परामर्श पर भगवान कृष्ण ने मिथ्या दोष से मुक्ति के लिये गणेश चतुर्थी के व्रत को किया और मिथ्या दोष से मुक्त हो गये।

Ganesh Chaturthi 2024भूल से हो जाए चंद्र दर्शन तो इस मंत्र का करें जाप

द्रिक पंचांग के अनुसार, अगर भूल से गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन हो जायें तो मिथ्या दोष से बचाव के लिये निम्नलिखित मन्त्र का जाप करना चाहिये -

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी का बहुत महत्व है क्योंकि यह भगवान गणेश के जन्म का जश्न मनाता है, जो ज्ञान, समृद्धि और बाधाओं को दूर करने का प्रतीक है। यह सार्वजनिक समारोहों और विस्तृत अनुष्ठानों के माध्यम से सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है। यह त्यौहार भक्ति पर जोर देता है। अंत में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन जन्म, जीवन और विघटन के चक्र का प्रतीक है, जो वैराग्य और आध्यात्मिक विकास के महत्व को सिखाता है।

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